हिंदी के प्रमुख महाकाव्य और साहित्य के बारे में प्रमुख जानकारी भाग 2

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हिंदी के प्रमुख महाकाव्य और साहित्य के बारे में प्रमुख जानकारी

संस्कृत काव्यशास्त्र में महाकाव्य (एपिक) का प्रथम सूत्रबद्ध लक्षण आचार्य भामह ने प्रस्तुत किया है और परवर्ती … आचार्य विश्वनाथ का लक्षण निरूपण इस परंपरा में अंतिम होने के कारण सभी पूर्ववर्ती मतों के सारसंकलन के रूप में उपलब्ध है। … का उपर्युक्त निरूपण महाकाव्य के स्वरूप की वैज्ञानिक एवं क्रमबद्ध परिभाषा प्रस्तुत करने के स्थान पर उसकी प्रमुख और गौण …. संस्कृत साहित्य के महाकाव्यों की विकास-परम्परा में संस्कृत व्याकरण के ‘मुनित्रय’ – पाणिनि, वररुचि तथा पतंजलि का स्थान और  दुनिया में सबसे पुराना वाचिक साहित्य हमें आदिवासी भाषाओं में मिलता है। … भाषा में सूरदास तथा, मारवाड़ी में मीराबाई, खड़ीबोली में कबीर, रसखान, मैथिली में विद्यापति आदि प्रमुख हैं। …( Literature) · भारतीय साहित्य का जाल-पुस्तकालय एवं लेखकों और कवियों के बारे में जानकारी के लिए संपूर्ण स्रोत ‘पुस्तक’ · साहित्य में मूल्यबोध – डॉ॰ हरेकृष्ण मेहेर.

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(A). रीतिकाल के प्रमुख कवि और उनकी रचनाए –

कवि—————चनाए

(1).केशवदास——रामचंद्रिका, कविप्रिया,रसिप्रिया, विज्ञान गीता आदि

(2).भूषण——शिवराज भूषण, शिवाबावनी, छत्रसाल दशक

(3).मतिराम——रसराज, ललित ललाम, मतिराम सतसई, आदि

(4).बिहारी——सतसई

(5).पदमाकर——जगव्दिनोद, पद्दाभरण, गंगा लहर, कलि पच्चीसी आदि

(6).देव——भाव विलास. भवानी विलास, रस विलास, आदि

(7).घनानन्द——सुजान हित प्रबंध, वियोग बेलि, आदि

(8).भिखारी दास——काव्य निर्ण, छन्द प्रकाश, श्रृंगार निर्णय आदि

(9).सेनापति——कपित्त रत्नाकर

(10).बोधा——इश्कनमा, विरहवारीश

(B). रीतिकाल के प्रमुख प्रवृत्तियाँ – रीतिकाल के प्रमुख प्रवृत्तियो का विवरण निम्न लिखित है –

(1). आश्रयदाताओ की प्रशंसा
(2). श्रृंगारिक रचनाओ की प्रमुखता
(3). रीतिग्रंथो का निर्माण
(4). काव्य भाषा के रुप मे ब्रज भाषा की प्रतिष्ठा
(5). सवैया और दोहा छंदो का प्रचुर मात्रा मे प्रयोग
(6). प्रकृति मे उदीपन रूप मे चित्रण
(7). कला पक्ष की प्रधानता

(C). आधुनिक काल – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रंथ ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ मे आधुनिक काल को गद्य काल का नाम दिया |
गद्य का परिपूर्ण विकास आधुनिक काल मे ही हुआ है | इस काल मे नवीन छंदो, अलंकारो तथा नवीन शैलियो का विकास हुआ | कविता बंधनो से मुक्त हो गई | कवियो ने स्वछंद रुप से काव्यो के नये प्रतिमान स्थापित किये , सदियो से आ रही काव्य परम्पराओ को तोडा |