About Baba Saheb Bhimrao Ambedkar, The Father of Indian Constitution and first law minister of India

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India’s Constitution Maker Baba Saheb Bhimrao Ambedkar was born on April 14, 1891 in Mahu, Madhya Pradesh. His family was Marathi and originally from Amandava village of Ratnagiri district of Maharashtra. His father’s name was Ramji Maloji Sakpal and mother Bhimabai. Ambedkar was from Mahar caste.People of this caste were considered untouchable in society and they were discriminated against. Because of untouchability, they had to face difficulties in getting elementary education. Dr. Ambedkar’s first wife’s name was Ramabai. After the death of Ramabai, she had married another from Savita

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Social reformer and great leader Dr. Bhimrao Ambedkar campaign against the social discrimination against the Dalits and supported women’s rights.

Bhimrao Ambedkar Azad became the first law minister of India. In 1990, he was honored with Bharat Ratna, India’s highest civilian honor. Ambedkar is also known as Baba Saheb.

In 1913, Bhimrao was selected to read Columbia University in the United States, from which he graduated in political science.
In 1916, he was awarded PhD for a research.
In 1923 he completed his research under the name ‘The Problem of the Rupee’ and the University of London gave him the title of Doctor of Science.
In 1927, Columbia University gave him a Ph.D. He had about 32 degrees.

In 1936, founded the Independent Labor Party. This party won 15 seats in the central assembly elections in 1937. Mahatma Gandhi called the Dalit community Harijan, but Ambedkar criticized the matter.
Between 1941 and 1945, he wrote many controversial books, including ‘Thoughts on Pakistan’ and ‘Whatever Congress and Gandhi Have Done to the Untouchables’.

Ambedkar was appointed Chairman of the Constitution Drafting Committee of India on 29 August 1947. Baba Saheb’s special contribution in making the Constitution of India
Baba Saheb Ambedkar adopted Buddhism.
Ambedkar wrote the last book ‘The Buddha and His Dhamma’ written on Buddhism.
He died on December 6, 1956 in Delhi.

भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था।उनका परिवार मराठी था और मूल रूप से महाराष्‍ट्र के रत्‍नागिरी जिले के आंबडवे गांव से था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मां भीमाबाई थीं। अंबेडकर महार जाति के थे। इस जाति के लोगों को समाज में अछूत माना जाता था और उनके साथ भेदभाव किया जाता था। छुआछूत भेदभाव की वजह से उन्‍हें प्रारंभ‍िक श‍िक्षा लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। डॉ। अंबेडकर की पहली पत्नी का नाम रमाबाई था । रमाबाई की मृत्यु के बाद उन्होंने सविता से दूसरा विवाह किया था

समाज सुधारक और महान नेता डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर ने दलितों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया और महिला अधिकारों का समर्थन किया।

भीमराव अंबेडकर आजाद भारत के पहले कानून मंत्री भी बने।1990 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। अंबेडकर को बाबा साहेब के नाम से भी जाना जाता है।

1913 में अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए भीमराव का चयन किया गया, जहां से उन्‍होंने राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया।
1916 में उन्‍हें एक शोध के लिए पीएचडी से सम्‍मानित किया गया।
1923 में उन्‍होंने ‘The Problem of the Rupee’ नाम से अपना शोध पूरा किया और लंदन यूनिवर्सिटी ने उन्‍हें डॉक्‍टर्स ऑफ साइंस की उपाध‍ि दी।
1927 में कोलंबंनिया यूनिवर्सिटी ने भी उन्‍हें पीएचडी दी। इनके पास तकरीबन 32 डिग्रियां थीं।
1936 में स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की। इस पार्टी ने 1937 में केंद्रीय विधानसभा चुनावों मे 15 सीटें जीती। महात्‍मा गांधी दलित समुदाय को हरिजन कहकर बुलाते थे, लेकिन अंबेडकर ने इस बात की खूब आलोचना की।
1941 और 1945 के बीच उन्‍होंने कई विवादित किताबें लिखीं जिनमें ‘थॉट्स ऑन पाकिस्‍तान’ और ‘वॉट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू द अनटचेबल्‍स’ भी शामिल हैं।
29 अगस्‍त 1947 को अंबेडकर को भारत के संविधान मसौदा समिति का अध्‍यक्ष न‍ियुक्‍त क‍िया गया। भारत के संविधान को बनाने में बाबा साहेब का खास योगदान है।
बाबा साहेब अंबेडकर ने बौद्ध धर्म को अपना लिया।
अंबेडकर ने आख‍िरी किताब बौद्ध धर्म पर लिखी ‘द बुद्ध एंड हिज़ धम्‍म’।
6 दिसंबर 1956 को दिल्‍ली में उनका निधन हो गया

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