History of Jallianwala Bagh Massacre April 13, 1919, 100 Years complete

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History of Jallianwala Bagh Massacre

On 13th April 1919, British officer General Dyer had indiscriminately fired gunfire on the unarmed mob in Jallianwala Bagh, Amritsar. In Amritsar Jail Jivala Bagh, where there are still survivors, there are targets of bullets fired on non-combatants. Thousands were killed in this massacre, but only 379 murders were reported in British government figures.

On the day of Baisakhi, there was a meeting to protest against the Rulelet Act in Jallianwala Bagh. There was also a fair on Baisakhi day in Jallianwala Bagh, where hundreds of people had reached that day to join. Then, the British Regiment Brigadier Reginald Dyer of the British Army reached there with 90 soldiers. The soldiers surrounded the garden without warning, started firing on unarmed people. Many people jumped into the well built wells in the garden to save lives, which is now called ‘Shaheedi Kuan’.

Udham Singh went to London on March 13, 1940 to take revenge for the Jallianwala Bagh massacre There, he shot Dyer in Caxton Hall and shot him dead. Udham Singh was hanged on July 31, 1940. Udham Singh Nagar of Uttarakhand has been named after him. Jalianwala Bagh massacre impressed Bhagat Singh in inner

History of Jallianwala Bagh Massacre 100 Years of April 13, 1919, 100th anniversary of Jallianwala Bagh

On April 13, 2019, when the 100 years of massacre of Jallianwala Bagh in Amritsar, people remembered the martyrs and paid homage.

जलियांवाला बाग हत्याकांड का इतिहास 13 अप्रैल, 1919 के 100 साल

13 अप्रैल, 1919 को अंग्रेज अफसर जनरल डायर General Dyer ने अमृतसर के जलियांवाला बाग Jallianwala Bagh में मौजूद निहत्‍थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थीं।अमृतसर जलियांवाला बाग Jallianwala Bagh में, जहां अब भी मौजूद हैं निहत्थों पर बरसाई गई गोलियों के निशां है । इस नरसंहार में हजारों लोग मारे गए थे लेकिन ब्रिटिश सरकार के आंकड़ें में सिर्फ 379 की हत्या दर्ज की गई है।

बैसाखी के दिन जलियांवाला बाग Jallianwala Bagh में रॉलेट एक्‍ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी। जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन मेला भी लगता था, जिसमें शामिल होने के लिए उस दिन सैकड़ों लोग वहां पहुंचे थे।तब उस समय की ब्रिटिश आर्मी का ब्रिगेडियर जनरल रेजिनैल्‍ड डायर 90 सैनिकों को लेकर वहां पहुंच गया। सैनिकों ने बाग को घेरकर ब‍िना कोई चेतावनी दिए निहत्‍थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। कई लोग जान बचाने के लिए बाग में बने कुएं में कूद गए थे, जिसे अब ‘शहीदी कुआं’ कहा जाता है.

जलियांवाला बाग Jallianwala Bagh हत्‍याकांड का बदला लेने के लिए 13 मार्च, 1940 को ऊधम सिंह लंदन गए. वहां उन्‍होंने कैक्सटन हॉल में डायर को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया. ऊधम सिंह को 31 जुलाई, 1940 को फांसी पर चढ़ा दिया गया. उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर का नाम उन्‍हीं के नाम पर रखा गया है.
जलियांवाला बाग हत्‍याकांड ने भगत सिंह को भीतर तक प्रभावित किया

जलियांवाला बाग हत्याकांड का इतिहास 13 अप्रैल, 1919 के 100 साल, जालियांवाला बाग की 100वीं बरसी

13 अप्रैल, 2019 को अमृतसर के जलियांवाला बाग के नरसंहार कांड के 100 साल पूरे होने पर लोगों ने शहीदों को याद किया और श्रद्धांजलि दी।

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Q. जलियांवाला बाग हत्याकांड कब व कहाँ हुआ.
Ans. 1919 ई., अमृतसर

Q ‘रोलेट एक्ट’ कब पारित हुआ.
Ans. 1919 ई.

Q जलियांवाला बाग में गोली चलाने का आदेश किसने दिया.
Ans जनरल ओ. डायर ने

Q जनरल डायर की हत्या किसने की.
Ans. ऊधम सिंह

Q जलियांवाला बाग कांड के समय भारत का वायसराय कौन था.
Ans. लॉर्ड चेम्सफोर्ड

Q 1919 ई. में पंजाब में हुए अत्याचारों के फलस्वरूप किसने ब्रिटिश सरकार से प्राप्त ‘सर’ की उपाधि लौटा दी थी

Ans रवींद्रनाथ टैगोर ने

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