Indian Moon Mission Successful Launch Of Chandrayaan-2 Lander And Rover part 2

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(1).चंद्रयान-2 के प्रमुख उद्देश्य (Major Objectives of Chandrayaan-2).

During a mission, study the elements present in the surface of the Moon to find out what its rock and clay are made of. Try to find magnesium, calcium and iron in them. To study the structure of trenches and peaks present there. To study the density of the surface of moon and the change in it. The thermal properties near the poles, in the ionosphere of the Moon To study the quantity of electrons. In addition to finding water on the surface of moonlight, finding hydroxyl marks.And Take 3-D photographs of the moon’s surface. Also, to find signs of water there and also to check the outer layer of the moon.

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(A).मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह में मौजूद तत्त्वों का अध्ययन कर यह पता लगाना कि उसके चट्टान और मिट्टी किन तत्त्वों से बनी है. उनमें मैग्निशियम, कैल्शियम और लोहे जैसे खनिज को खोजने का प्रयास करना.वहाँ मौजूद खाइयों और चोटियों की संरचना का अध्ययन करना.चंद्रमा की सतह का घनत्व और उसमें होने वाले परिवर्तन का अध्ययन करना.ध्रुवों के पास की तापीय गुणों, चंद्रमा के आयनोंस्फीयर में इलेक्ट्रानों की मात्रा का अध्ययन करना.चंद्रमा की सतह पर जल, हाइड्रॉक्सिल के निशान ढूंढने के अलावा चंद्रमा के सतह की 3-D तस्वीरें लेना.इसके साथ ही वहां पानी होने के संकेतो की भी तलाश करना और चांद की बाहरी परत की भी जांच करना.

(2).चंद्रयान-2 से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य(Some important facts related to Chandrayaan-2).

(A). Chandrayaan-2 will be launched by Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mark 3 (GSLV Mk III). Chandrayaan-2 weighs about 3.8 ton, which is approximately equal to the weight of eight adult elephants.India moon’s dust It is going to reach the southern part. It will be an example of soft landing for future missions. Chandrayaan-2 will take 13 different scientific instruments to study the Moon.and There are eight payloads on the orbiter, three on the lender and two on the rover. Chandrayaan-2 is a completely indigenous campaign. The delay in ensuring the strength of Chandrayaan-2 and being fully convinced of its success.

(B). The moon has always been an important subject for mankind. Always the scientists and the entire human race have the curiosity to know about the moon. There is no doubt that this satellite is considered to be very suitable for life outside Earth. This is the reason that space agencies from many countries have been sending their vehicle from time to time. India too is not behind this task. India has constantly achieved new achievements in space.

(A).चंद्रयान-2 को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (GSLV Mk III) के ज़रिये लॉन्च किया जाएगा.चंद्रयान-2 का वज़न लगभग 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वज़न के लगभग बराबर है.भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है.यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा.चंद्रयान-2 चंद्रमा का अध्ययन करने के लिए 13 विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों को ले जाएगा. जिसमें ऑर्बिटर पर आठ पेलोड, लैंडर पर तीन और रोवर पर दो शामिल हैं.चंद्रयान-2 पूरी तरह स्वदेशी अभियान है.चंद्रयान-2 में मज़बूती को सुनिश्चित करने और इसकी कामयाबी के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए देरी की गई.

(B).चाँद हमेशा से ही मानव जाति के लिये एक महत्वपूर्ण विषय रहा है. हमेशा से ही वैज्ञानिकों और पूरी मानव जाति को चाँद के बारे में जानने कि जिज्ञासा रहती है. इसमें कोई संदेह नहीं हैं कि पृथ्वी के सबसे करीब इस उपग्रह को पृथ्वी से बाहर जीवन के लिये काफी उपयुक्त माना जाता रहा है. यही वजह है कि अनेक देशों की अंतरिक्ष एजेंसियाँ समय-समय पर चाँद पर अपने यान भेजती रही हैं. भारत भी इस कार्य में पीछे नहीं है. भारत ने अंतरिक्ष में लगातार नई उपलब्धियाँ हासिल की है.

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