Indian Political Economics, Rajasthan Political Economics 0 Comments

काउंसिल ऑफ स्टेट्स, जिसे राज्य सभा भी कहा जाता है, एक ऐसा नाम है जिसकी घोषणा सभापीठ द्वारा सभा में 23 अगस्त, 1954 को की गई थी। इसकी अपनी खास विशेषताएं हैं। भारत में द्वितीय सदन का प्रारम्भ 1918 के मोन्टेग-चेम्सफोर्ड प्रतिवेदन से हुआ। राज्य सभा भारतीय लोकतंत्र की ऊपरी प्रतिनिधि सभा है। लोकसभा निचली

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भारतीय संविधान के भाग 5 तथा अनुच्छेद 79-123 तक संसद का उल्लेख किया गया है। -संसद का मुख्य कार्य कानुन का निर्माण करना तथा संविधान संसोधन करना होता है। भारतीय संसद को व्यवस्थापिका भी कहते है। जिसके दो सदन हैं – उच्चसदन राज्यसभा और निम्नसदन लोकसभा। राज्यसभा में 250 सदस्य होते हैं जबकि लोकसभा में

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लोकसभा वयस्क मताधिकार के तहत लोगों द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधियों से बनती है। संविधान के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 हो सकती है, जिनमें से 530 सदस्य राज्यों से चुने जा सकते हैं, जबकि 20 सदस्य केन्द्रशासित प्रदेशों से चुने जा सकते हैंl इसके अलावा यदि राष्ट्रपति को

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हमारे संसदीय लोकतंत्र में एक अध्यक्ष (स्पीकर) का पद एक निर्णायक स्थिति वाला होता है। भारत में लोकसभा का अध्यक्ष संसद के निम्न सदन (लोक सभा) का सभापति होता है। लोकसभा-अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा चुनावों के बाद, लोकसभा की सर्वप्रथम बैठक में ही कर लिया जाता है, जो कि संसद के सदस्यों में से ही पाँच साल

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भारत के संविधान की उद्देशिका अथवा प्रस्तावना को ‘संविधान की कुंजी’ कहा जाता है ।42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा इसमें ‘समाजवाद’, ‘ पंथनिरपेक्ष ‘ और ‘राष्ट्र की अखंडता’ शब्द जोड़े गए,संविधान सभा मेँ प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है। उद्देश्यिका …. चाहे वह धर्म के आधार पर हो, जाति, लिंग, जन्म अथवा राष्ट्रीयता

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