Types of soils and soils of Rajasthan

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Types of soils and soils of Rajasthan

Scientifically, the soil of Rajasthan is classified as such, this soil is found in the middle and southern parts of Udaipur district and the entire Durgapur district.Sandy soil is about 31.7 lakh hectares of sandy land in India,Brown and The types of soil available in Rajasthan are mostly sandy, saline, alkaline and chalky (calcareous). Clay, loamy, black lava soil and nitrogenous soils are also found. The types of soil available in Rajasthan are mostly sandy, saline, alkaline and chalky (calcareous).And sandy soil,Red and yellow soil,Red Loamy Clay,Mixed Red and Black Clay,Medium Black Clay,Alluvial alluvial soil,Saline soil.

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Rajasthan, mainly soil is classified on the basis of fertility.

(A). Types of soils in Rajasthan-

(1). Sandy clay or loamy soil

(2). Red loamy soil or red loam soil

(3). Black soil or regar soil

(4) .Domit soil or alluvial soil or alluvial soil or trembling soil

(5). Full loam soil or yellow soil

(6). Brown sand

(7). Alkaline and saline soil

(1). Sandy clay or loamy soil-

(A). Area- Sandy soil or sandy soil area in Rajasthan is considered as western districts of Rajasthan. In which Rajasthan’s main districts are Jaisalmer, Barmer, Bikaner, Jalore, Jodhpur. There is Nagaur, Churu, Jhunjhunu.

(B). Characteristics- Sandy soil or sandy soil of Rajasthan has high calcium content and lack of nitrogen.

(C). Major crop- Kharif crop in sandy or sandy soil of Rajasthan is considered useful for moong, moth, millet, jowar.

(2). Red loamy soil or red loam soil –

(A). Area- The area of ​​red loamy soil or red loam soil in Rajasthan is considered to be the southern districts of Rajasthan. In which the major districts of Rajasthan are Udaipur, Chittorgarh, Banswara, Pratapgarh, Dungarpur.

(B). Characteristics- Due to excess iron in the red loamy soil or red loam soil of Rajasthan, the color of this soil appears red. This soil lacks nitrogen, phosphorus and calcium salts. The ability to hold moisture in this soil is amazing.

(C). Major crop- Red loamy soil or red loam soil of Rajasthan is considered useful for crops like sugarcane, maize, rice.

राजस्थान की मिट्टियाँ मिट्टियों के प्रकार

राजस्थान में मुख्यतः मिट्टियों का वर्गीकरण उर्वरकता के आधार पर किया गया है।

(A).राजस्थान में मिट्टियों के प्रकार-

(1).रेतीली मिट्टी या बलुई मिट्टी

(2).लाल लोमी मिट्टी या लाल दोमट मिट्टी

(3).काली मिट्टी या रेगर मिट्टी

(4).दोमट मिट्टी या कछारी मिट्टी या जलोढ़ मिट्टी या कांप मिट्टी

(5).भूरी दोमट मिट्टी या पीली मिट्टी

(6).भूरी बलुई मिट्टी

(7).क्षारीय व लवणीय मिट्टी

(1).रेतीली मिट्टी या बलुई मिट्टी-

(A).क्षेत्र- राजस्थान में रेतीली मिट्टी या बलुई मिट्टी का क्षेत्र राजस्थान के पश्चिमी जिलों को माना जाता है। जिसमें राजस्थान के प्रमुख जिले जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जालोर, जोधपुर. नागौर, चुरू, झुंझुनू है।

(B).विशेषताएं- राजस्थान की रेतीली मिट्टी या बलुई मिट्टी में कैल्शियम की मात्रा अधिक है तथा नाइट्रोजन की कमी है।

(C).प्रमुख फसल- राजस्थान की रेतीली मिट्टी या बलुई मिट्टी में खरीफ की फसल मूंग, मोठ, बाजरा, ज्वार के लिए उपयोगी मानी जाती है।

(2).लाल लोमी मिट्टी या लाल दोमट मिट्टी-

(A).क्षेत्र- राजस्थान में लाल लोमी मिट्टी या लाल दोमट मिट्टी का क्षेत्र राजस्थान के दक्षिणी जिलों को माना जाता है। जिसमें राजस्थान के प्रमुख जिले उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूँगरपुर है।

(B).विशेषताएं- राजस्थान की लाल लोमी मिट्टी या लाल दोमट मिट्टी में आयरन की अधिकता होने के कारण इस मिट्टी का रंग लाल दिखाई देता है। इस मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस व कैल्शियम लवणों की कमी है। इस मिट्टी में नमी धारण करने की क्षमता अद्भुत है।

(C).प्रमुख फसल- राजस्थान की लाल लोमी मिट्टी या लाल दोमट मिट्टी गन्ना, मक्का, चावल जैसी फसलों के लिए उपयोगी मानी जाती है।